देवली की कूंचलवाड़ा रोड़ जैन कॉलोनी में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में गुरुवार से पंचकल्याणक एवं नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव श्रीजी की शोभायात्रा के साथ शुरू हो गया। आयोजन स्थल पर ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण कार्यक्रमों के बाद प्रवचन हुए।
धर्मसभा में आर्यिका गणिनी स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि मनुष्य जीव ही गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं मोक्ष की पंच कल्याणक क्रियाओं से भगवान बनते है। पंचकल्याणक भावों से करें तो असंख्य पूण्य और अनंत पापों का नाश करता है। जिस तरह लाभ शब्द को उल्टा करेंगे तो भला होता है वैसा ही महत्व पंचकल्याणक का है। मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा पंचम काल मे भगवान पैदा नही होते। लेकिन पंचकल्याणक में उसकी तरह की क्रिया से पाषाण से भगवान बनाने की क्रिया संपन्न की जाती है। उन्होंने कहा कुंभकार मिट्टी को मिलाकर तपडे लगाकर आकर देता है। वही तपकर घड़ा बनकर पानी भरने पर शीतलता और सिर पर धारण कर मंगल बन जाता है। वैसे ही मनुष्य जीवन में तप व तपस्या कर केवल ज्ञान की शक्ति प्राप्त करें। मुनिश्री ने कार्यक्रम में ध्वजारोहण करने को विजय व समृद्वि का प्रतीक बताया।
महोत्सव पर निकाली घट व श्रीजी की शोभायात्रा- महोत्सव की शुरुआत में श्री महावीर मंदिर से मुनि वैराग्य सागर, मुनि सुप्रभ सागर, आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में घट व श्रीजी की शोभायात्रा मुख्य बाजार, पेट्रोल पंप होकर कूंचलवाड़ा रोड से जैन कॉलोनी आयोजन स्थल पहुंची। जिसमे बैण्ड बाजे एवं घोड़ी बग्गियों में भगवान के माता-पिता, सोधर्म इन्द्र परिवार, यज्ञ नायक, कुबेर इन्द्र, सानत, इशान इन्द्र, महेन्द्र, ब्रह्म इन्द्र, ब्रह्मोत्तर, लान्तव इन्द्र, कपिष्ठ, शुक्र इन्द्र, महाशुक्र, सत्तार इन्द्र बैठे थे। वही महिला, युवा मण्डल एवं पुरुष भजनों पर नृत्य कर साथ चल रहे थे।
गर्भ कल्याणक संस्कार, गोदभराई की रस्में निभाई- प्रतिष्ठाचार्य देवेश शास्त्री, कपिल भैयाके निर्देशन में दोपहर में सकलीकरण, यागमण्डल विधान, गर्भ कल्याणक संस्कार, गोदभराई की क्रियाएं की गई। सांय काल महाआरती, शास्त्र प्रवचन, सौधर्म सभा, कुबेर द्वारा नगरी की रचना, सोलह स्वप्न, माताजी का श्रृंगार, अष्टकुमारियो द्वारा मां की सेवा आदि कार्यक्रम होंगे।
तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक पर जुलूस 4 को- पार्श्वनाथ दिगम्बर मन्दिर जैन कॉलोनी लघु पंच कल्याण महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार 4 अप्रेल को जन्म कल्याणक में प्रातः जाप, पूजन तीर्थंकर बालक का जन्म, मुनि श्री की दिव्य देशना, इंद्राणी को प्रथम दर्शन, जन्मकल्याणक जुलूस, पांडुशिला का जन्म अभिषेक, दोपहर में तीर्थंकर बालक का श्रृंगार, शाम को आरती, शास्त्रसभा, रात्रि को आनंदोत्सव, बालक को पालना व बाल क्रीड़ा कार्यक्रम होंगे।
जैन मन्दिर में पंचकल्याणक एवं नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ

